

लोहाघाट। सरयू नदी घाटी क्षेत्र के दूरस्थ नेत्र सलान और सिंगदा घाट जैसे दुर्गम इलाकों से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद बेटियों ने अपनी मेहनत से सफलता की नई मिसाल कायम की है।
दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई को लेकर चिंतित छात्राओं के बीच राजकीय प्राथमिक विद्यालय च्यूरानी की प्रधानाध्यापिका मंजू बाला की चिंता बेवजह नहीं थी। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मंजू बाला पिछले 20 वर्षों से ऐसे क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रही हैं, जहां अधिकांश शिक्षक जाने से भी कतराते हैं। उन्होंने न सिर्फ बच्चों को शिक्षा दी, बल्कि ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए।
इन दुर्गम क्षेत्रों की छात्राओं की लगन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में सभी बेटियां प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुईं। यह साबित करता है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
छात्राओं की आगे की शिक्षा को लेकर उठ रही चिंता को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने पहल की है। उन्होंने छात्राओं और शिक्षिका के प्रयासों की सराहना करते हुए आश्वासन दिया कि अगले महीने के दूसरे सप्ताह से दोनों हाई स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
जिलाधिकारी की कार्यशैली को देखते हुए स्थानीय लोगों में भरोसा है कि यह वादा जल्द ही धरातल पर उतरेगा। शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षिका और मेहनती छात्राओं की यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहयोग से पहाड़ की बेटियां किसी भी ऊंचाई को छू सकती हैं।


