

चंपावत। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा विभाग की ओर से नगर के लक्ष्मी मार्केट में आयोजित तीन दिवसीय विशेष चिकित्सा शिविर में 773 लोगों ने विभिन्न आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ उठाया। शिविर के माध्यम से लोगों को आयुर्वेदिक उपचार की विभिन्न विधियों की जानकारी देने के साथ ही उन्हें अपनी जीवनशैली और खान-पान को प्रकृति के अनुरूप रखने के लिए जागरूक किया गया।
शिविर में क्षार सूत्र पद्धति लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही। चिकित्सकों ने बताया कि इस पद्धति का उपयोग बवासीर और भगंदर जैसे रोगों के उपचार में किया जाता है। जानकारी मिलने के बाद कई लोगों ने इन समस्याओं के उपचार के प्रति रुचि दिखाई। लोगों ने चिकित्सकों से अपनी समस्याओं को लेकर परामर्श भी लिया। शिविर में क्षार सूत्र के लिए महिला चिकित्सक की आवश्यकता भी महसूस की गई, ताकि महिला रोगी सहजता से अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
शिविर में पंचकर्म, स्वेदन, सर्वांग स्वेदन, शिरोधारा, नेत्र चिकित्सा, नस्य, अग्नि चिकित्सा, जालौका चिकित्सा, काय चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, मर्म चिकित्सा, शालाक्य, पोटली स्वेदन और प्रकृति परीक्षण जैसी विभिन्न आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों के बारे में लोगों को जानकारी दी गई। अग्नि एवं मर्म चिकित्सा को लेकर भी लोगों में काफी रुचि दिखाई दी।
चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेद में उपचार के साथ-साथ आहार, दिनचर्या और जीवनशैली का भी विशेष महत्व है। प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने और संतुलित आहार लेने से कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है। शिविर में लोगों को दैनिक जीवन में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और आयुर्वेदिक सिद्धांतों को समझने की जानकारी दी गई।
शिविर के दौरान लोगों को पानी पीने के सही तरीके, खान-पान और विभिन्न घरेलू स्वास्थ्य उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई। सुबह लहसुन का सेवन सहित कई सामान्य स्वास्थ्य आदतों के बारे में विशेषज्ञों ने लोगों को जागरूक किया। हालांकि चिकित्सकों ने किसी भी रोग में घरेलू उपचार के साथ आवश्यकता पड़ने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाश बसेड़ा ने बताया कि शिविर के बाद एक्सीलेंस सेंटर में आयुर्वेदिक चिकित्सा के विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराने के लिए दो-दो दिन का रोस्टर तैयार किया जा रहा है। इससे लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श और उपचार का लाभ मिल सकेगा।
शिविर में डॉ. आनंद सिंह, डॉ. सुधाकर गंगवार, डॉ. गिरेंद्र चौहान, सर्जन डॉ. भास्कर समेत अन्य चिकित्सकों ने लोगों को विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी दी।
वहीं नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने भी शिविर में पहुंचकर आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों को नजदीक से समझने में रुचि दिखाई। कॉलेज की प्रधानाचार्य श्रीमती रावत भी आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति लोगों को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आयुर्वेद से मिले अपने अनुभव साझा करते हुए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
शिविर के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि आयुर्वेद केवल रोग के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, उचित आहार और प्रकृति के अनुरूप दिनचर्या के माध्यम से स्वास्थ्य संरक्षण पर भी जोर देता है।



