

फोटो : सीमांत क्षेत्र के लाखों लोगों की धड़कनों का भरोसा बने वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. के.के. पुनेठा।

लंदन से मायावती तक निःशुल्क सेवा, 87 वर्ष की उम्र में भी मानवता की मिसाल और सीमांत की लाखों धड़कनों का भरोसा—चंपावत के तीन चिकित्सकों की प्रेरक कहानी।
(गणेश दत्त पांडे)
लोहाघाट। डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप यूं ही नहीं कहा जाता। जब चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का माध्यम बन जाती है, तब एक चिकित्सक समाज के लिए देवदूत बन जाता है। सीमांत जनपद चंपावत में ऐसे कई डॉक्टर हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और संवेदनशीलता से हजारों लोगों को नया जीवन दिया है। राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे पर ऐसे ही तीन चिकित्सकों की प्रेरक कहानी, जिन्होंने मानव सेवा को ही अपना सबसे बड़ा धर्म बनाया।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. कृष्ण सिंह हर वर्ष इंग्लैंड से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ अद्वैत आश्रम मायावती के धर्मार्थ चिकित्सालय पहुंचते हैं। यहां वे गरीब और जरूरतमंद मरीजों का निःशुल्क उपचार और जटिल ऑपरेशन कर उन्हें नया जीवन देते हैं। उनका कहना है कि किसी मरीज को स्वस्थ होकर मुस्कुराते हुए घर लौटते देखना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मानव सेवा का यह संस्कार उन्हें अपने पिता डॉ. सी.एम. सिंह से मिला, जिनकी सेवाओं को देखते हुए देश में इंडियन वेटरिनरी डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। वर्षों से मायावती अस्पताल में उनकी सेवाएं सीमांत क्षेत्र के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।

फोटो : इंग्लैंड से हर वर्ष मायावती अस्पताल पहुंचकर निःशुल्क चिकित्सा सेवा देते अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सर्जन डॉ. कृष्ण सिंह।
पांडिचेरी के जिपमर के पूर्व निदेशक एवं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. डी.एस. दुबे पिछले 17 वर्षों से लगातार मायावती अस्पताल में निःशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। 87 वर्ष की आयु में भी उनका सेवा भाव पहले जैसा ही अटूट है। उन्होंने अपने पुत्र डॉ. दीपक दुबे, जो न्यूरोलॉजिस्ट एवं रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन हैं, को भी इस सेवा अभियान से जोड़ दिया है। पिता-पुत्र की यह जोड़ी गरीब मरीजों के ऐसे जटिल ऑपरेशन कर रही है, जिनका खर्च निजी अस्पतालों में लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। मायावती अस्पताल की ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ की भावना ने उनके सेवा संकल्प को और मजबूत किया है।

फोटो : 87 वर्ष की आयु में भी मायावती अस्पताल में निःशुल्क सेवा देते डॉ. डी.एस. दुबे अपने पुत्र डॉ. दीपक दुबे के साथ।
लोहाघाट के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ एवं फिजिशियन डॉ. के.के. पुनेठा आज चंपावत ही नहीं, पिथौरागढ़ और नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए भरोसे का नाम हैं। बड़े शहरों के आकर्षक प्रस्तावों को ठुकराकर उन्होंने सीमांत क्षेत्र की सेवा को प्राथमिकता दी। हृदय रोगों की सटीक पहचान और वर्षों के अनुभव के कारण हर वर्ष विशेषकर सर्दियों में सैकड़ों लोगों की जान बचती है। मरीजों का विश्वास है कि उनकी सलाह बड़े महानगरों के विशेषज्ञों की राय से मेल खाती है। यही कारण है कि सीमांत क्षेत्र के लोगों के लिए डॉ. पुनेठा केवल चिकित्सक नहीं, बल्कि जीवनदाता की पहचान बन चुके हैं।


