30 साल पहले शुरू हुआ सफर—आज “खैचुवा” बना ग्रामीण समृद्धि का प्रतीक

‘खैचुवा’ के जायके से बदली पूरी खेतीखान क्षेत्र की तस्वीर।

 

 

रिंकू ने साबित किया—स्थानीय उत्पाद भी बन सकते हैं अंतरराष्ट्रीय ब्रांड।

 

 

लोहाघाट। अक्सर कहा जाता है कि बड़े सपने देखने के लिए महानगरों की जरूरत होती है, लेकिन खेतीखान के युवक रिंकू ओली ने यह भ्रम तोड़ दिया है। पहाड़ की शांत वादी में बनी एक पारंपरिक मिठाई ‘खैचुवा’ ने न सिर्फ उनके परिवार की किस्मत बदली, बल्कि पूरे इलाके में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई रोशनी जलाई है। बीते तीन दशकों में जहां गांवों से पलायन लगातार बढ़ रहा है, वहीं पवन ओली और उनके बेटे रिंकू ने साबित किया कि अगर स्थानीय उत्पाद को सही दिशा मिले तो गांव भी ब्रांड बन सकते हैं। 30 साल पहले शुरू हुआ सफर—आज “खैचुवा” बना ग्रामीण समृद्धि का प्रतीक बन गया है

तीन दशक पूर्व गौशनी गांव के पवन ओली ने खेतीखान में एक साधारण सी चाय-पानी की दुकान खोली। साथ में बनाई गई उनकी लापसी ने लोगों का दिल जीत लिया। स्वाद और साफ-सफाई की बदौलत दुकान की पहचान बढ़ती गई और यही एक छोटा सा प्रयास आज पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाला बन चुका है।

डिप्लोमा इंजीनियर रिंकू ने जब आधुनिक तरीके से व्यवसाय विस्तार का निर्णय लिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना से 12 लाख का ऋण लेकर उन्होंने नया शोरूम बनाया। यहीं से “खैचुवे” को मिला वह मंच, जिसने इसे पहाड़ की नई पहचान बना दी। आज 500 लीटर दूध प्रतिदिन इस्तेमाल कर तैयार होने वाली यह मिठाई न केवल स्थानीय बल्कि देश–विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की पहली पसंद बन चुकी है।

रिंकू के कारण खेतीखान में दुधारू पशुपालन को और बढ़ावा मिलने लगा अब रिंकू ने खैचुवे के साथ “जैविक शहद” व उच्चकोटी के “बेकरी” उत्पादों से खेतीखान की अलग पहचान बना दी है। रिंकू ने स्वयं मौन पालन व्यवसाय को आर्थिकी से जोड़ कर नए युवाओं को इस ओर आकर्षित भी किया है‌। यह कहानी बताती है कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिले तो गांव अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ बन सकते हैं।

 

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जिलाधिकारी बने रिंकू के उत्पादों के ब्रांड एंबेसडर।

 

लोहाघाट। तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत पांडे ने जब रिंकू की दुकान पर खैचुवा चखा तो उन्होंने प्रशंसा करते हुए कहा—“ग्रामीण उत्पादों में वह शक्ति है, जो किसी बड़े ब्रांड में भी नहीं। जो आप बनाते हैं, उसकी बिक्री की चिंता आप न करें।”

वर्तमान जिलाधिकारी मनीष कुमार ने भी युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा—

“ऐसे युवा गांव की नई अर्थव्यवस्था के निर्माता हैं। इनके प्रयासों से विकास की असली गाथा लिखी जाती है।”

 

 

 

फोटो कैप्शन- ‘खैचुवे’ का स्वाद चखती विदेशी महिला—स्थानीय उत्पाद की वैश्विक लोकप्रियता का प्रमाण।

30 साल पहले शुरू हुआ सफर—आज “खैचुवा” बना ग्रामीण समृद्धि का प्रतीक