

टनकपुर/चम्पावत। शारदा कॉरिडोर के तहत चल रहे कार्यों की आड़ में शारदा नदी में भारी मशीनों से खनन किए जाने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि अरुण इंटरप्राइजेज कंपनी द्वारा पोकलेन मशीनों से नदी की खुदाई कर बड़े पैमाने पर खनन सामग्री ट्रकों के जरिए बाहर भेजी जा रही है, जिससे खेतखेड़ा, शारदा चुंगी और हनुमानगढ़ी-नायकगोठ गांवों पर खतरा मंडराने लगा है।
ग्रामीणों के विरोध के बाद कांग्रेस प्रदेश सचिव आनंद महारा खुद मौके पर पहुंचे और शाम करीब 4 बजे ग्रामीणों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। मामला बढ़ता देख प्रशासन हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर खनन में लगे वाहनों को पकड़ लिया। पोकलेन मशीनों को सीज करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
कंपनी की ओर से इस कार्य को ‘चैनलाइजेशन’ बताया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि यह अवैध खनन है। विरोध करने पर कंपनी के साइड इंचार्ज विजय पाल और कर्मचारियों ने कथित तौर पर साफ कहा कि काम किसी भी हाल में नहीं रोका जाएगा, चाहे मामला उच्च स्तर तक क्यों न पहुंच जाए।
आनंद महारा ने आरोप लगाया कि पोकलेन मशीनों से खुदाई कर गांव की ओर बड़े-बड़े गड्ढे बना दिए गए हैं, जिससे भू-कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि नदी में इस तरह मशीनों के उपयोग की अनुमति नहीं है और नियमों की अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेतखेड़ा गांव को बचाने के लिए ब्रेथवेट कंपनी द्वारा फ्लड प्रोटेक्शन स्कीम के तहत कार्य किया जा रहा है, जिसकी लागत करीब 24 करोड़ रुपये बताई गई है। इस कार्य में आरपी इंफ्रा पावर कंपनी भी लगी हुई है, लेकिन शारदा कॉरिडोर के तहत इस निर्माण में दखल देकर पहले से बने ढांचे को नुकसान पहुंचाने और अलग निर्माण करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पहले चल रहे कार्यों से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल रहा था, लेकिन अब उस काम में बाधा डालकर रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही गांव की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ गया है।
आनंद महारा ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध खनन नहीं रोका गया और पोकलेन मशीनों को सीज नहीं किया गया, तो वह उग्र कदम उठाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने भी साफ कहा है कि यदि आगे भी खनन जारी रहा तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस पूरे मामले ने शारदा कॉरिडोर परियोजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां विकास कार्यों के बीच पर्यावरण, नियमों और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं।


