

फोटो—लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी करते रोडवेज कर्मचारी।
लोहाघाट। लोहाघाट रोडवेज डिपो की व्यवस्थाओं और कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर अब असंतोष बढ़ने लगा है। विशेष श्रेणी एवं संविदा पर लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों ने बसों की कमी, वर्कशॉप की स्थिति, जरूरी सामान के अभाव और स्थायीकरण सहित कई मुद्दों को उठाते हुए आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
कर्मचारियों का कहना है कि लोहाघाट डिपो में पहले की तुलना में बसों की संख्या लगातार घट रही है। सीमित बसों के संचालन से यात्रियों को परेशानी होने के साथ कर्मचारियों के सामने भी रोजगार और कार्य व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार बसों के रास्ते में खराब होने की स्थिति भी सामने आती है और डिपो में आवश्यक टायर व स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं होने से परेशानी बढ़ जाती है।
विशेष श्रेणी और संविदा पर 15 से 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक काम करने के बावजूद उनके स्थायी भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कर्मचारियों के मुताबिक सीमित मानदेय में परिवार की जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो रहा है, इसके बावजूद वे रोडवेज सेवा को जारी रखे हुए हैं।
गजेंद्र द्विवेदी, महिपाल सिंह, जाकिर अली, कौस्तुभ ओली और किशन सिंह आदि कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी समस्याओं को लगातार संबंधित स्तर पर उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि रोडवेज की बसों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं, ऐसे में डिपो को मजबूत करने और यात्रियों को भरोसेमंद परिवहन सुविधा देने की जरूरत है।
कर्मचारियों ने डिपो में पर्याप्त बसें उपलब्ध कराने, वर्कशॉप की व्यवस्था सुधारने, जरूरी पार्ट्स और टायर उपलब्ध कराने तथा वर्षों से कार्यरत संविदा एवं विशेष श्रेणी कर्मचारियों के भविष्य को लेकर ठोस निर्णय लेने की मांग की है।
रोडवेज एम्पलाइज यूनियन के डिपो अध्यक्ष तरुण रावल ने कहा कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने बताया कि 11 अक्टूबर को टनकपुर में पिथौरागढ़, लोहाघाट और टनकपुर डिपो के कर्मचारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में आगामी संघर्ष की रूपरेखा तय की जाएगी।



