नैनीताल एवं हल्द्वानी वन प्रभागों में वनाग्नि नियंत्रण हेतु मॉक ड्रिल का सफल आयोजन

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नैनीताल। वनाग्नि की रोकथाम एवं आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नैनीताल एवं हल्द्वानी वन प्रभागों में व्यापक स्तर पर वनाग्नि मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।

नैनीताल में यह मॉक ड्रिल पाइन्स आईटीआई परिसर में आयोजित की गई। मॉक ड्रिल का आयोजन आकाश गंगवार, प्रभागीय वनाधिकारी, नैनीताल एवं ममता चंद, उप प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देशन में किया गया।

काल्पनिक परिदृश्य के तहत सूचना प्राप्त हुई कि नैना रेंज बीट के कक्ष संख्या 3 एवं 4 में किसी व्यक्ति की लापरवाही से वनाग्नि फैल गई है। सूचना मिलते ही गठित विभिन्न टास्क फोर्स टीमों द्वारा न्यूनतम रिस्पांस टाइम में मौके पर पहुंचकर फायर लाइन एवं कंट्रोल फायर के माध्यम से आग पर नियंत्रण पाया गया। मॉक ड्रिल के दौरान घायल व्यक्तियों को स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा तत्काल प्राथमिक उपचार प्रदान कर आगे के उपचार हेतु बी.डी. पांडे चिकित्सालय रेफर किया गया। इस दौरान वन विभाग के संचार केंद्र के साथ पुलिस संचार केंद्र भी सक्रिय रहा।

 

मॉक ड्रिल में स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, लोक निर्माण विभाग, पेयजल निगम, बाल विकास विभाग, पशुपालन विभाग, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड, उत्तराखंड रिजर्व पुलिस बल, कुमाऊं विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स, राजकीय औद्योगिक संस्थान तथा वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।

 

कार्यक्रम के दौरान विवेक राय, अपर जिलाधिकारी नैनीताल, जगदीश चंद्र, एसपी क्राइम, मेजर मनोज जोशी, एनडीआरएफ से लक्ष्मण थपियाल, एफएसओ देवेंद्र सिंह नेगी सहित विभिन्न टास्क फोर्स लीडर—वन क्षेत्र अधिकारी ललित मोहन कार्की, विजय भट्ट, योगेश चंद तिवारी, मनोज भगत, आनंद लाल एवं प्रशिक्षित वन क्षेत्र अधिकारी अभय जोशी उपस्थित रहे।

 

इसी क्रम में हल्द्वानी वन प्रभाग में कुंदन कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी, हल्द्वानी के निर्देशन में छकाता रेंज अंतर्गत हनुमानगढ़ी क्रू स्टेशन के समीप वनाग्नि मॉक ड्रिल आयोजित की गई। मॉक ड्रिल में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग, एसडीआरएफ, राजस्व विभाग, सीआरपीएफ, गैर-सरकारी संगठन, स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, ग्रामवासी, युवा मंगल दल एवं महिला मंगल दल के सदस्यों ने सहभागिता की।

 

मॉक ड्रिल के दौरान सभी अग्निशमन उपकरणों, सुरक्षा संसाधनों एवं वायरलेस संचार उपकरणों का परीक्षण किया गया। मास्टर कंट्रोल रूम के साथ संचार व्यवस्था की जांच की गई तथा फील्ड कर्मचारियों एवं लाइन विभागों को उनके दायित्वों के संबंध में ब्रीफ किया गया। वन विभाग मुख्यालय देहरादून द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से फायर पॉइंट्स के जीपीएस निर्देशांक साझा किए गए, जिसके आधार पर फील्ड में कार्रवाई की गई।

 

काल्पनिक स्थिति में फायर वॉचर के घायल होने की सूचना पर तत्काल एसडीआरएफ एवं चिकित्सा दल को तैनात किया गया। घायल को सुरक्षित निकालकर एम्बुलेंस के माध्यम से निकटतम सरकारी अस्पताल भेजा गया। आग के फैलने की सूचना पर अग्निशमन विभाग को बुलाया गया और स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग से कम समय में आग पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया गया। अंत में सभी टीमों के साथ डिब्रीफिंग बैठक आयोजित की गई।

 

इस अवसर पर उप प्रभागीय अधिकारी गणेश जोशी, वन क्षेत्र अधिकारी लक्ष्मण सिंह मार्तोलिया, प्रदीप कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना एवं वनाग्नि जैसी आपात स्थितियों में त्वरित, समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा।

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