

गणेश दत्त पाण्डेय
चम्पावत। एक समय बुनियादी सुविधाओं और पलायन की चुनौतियों से जूझने वाला सीमांत जनपद चम्पावत आज विकास, सुशासन और जनभागीदारी का नया मॉडल बनकर उभर रहा है। 15 सितंबर 1997 को जिले के गठन के समय शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि एक दिन यही जिला उत्तराखंड के सबसे तेजी से विकसित हो रहे जनपदों में गिना जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चम्पावत ने बीते कुछ वर्षों में पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, डेयरी, सड़क, डिजिटल प्रशासन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वहीं जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली ने प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की नई मिसाल कायम की है।
जिले में मानसून के दौरान स्वला डेंजर जोन पर रातभर निगरानी, राहत एवं बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग, अधिकारियों की त्वरित जवाबदेही और आम लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान प्रशासन की नई कार्यसंस्कृति का हिस्सा बन चुका है। पर्यावरण मित्रों, श्रमिकों और फील्ड कर्मचारियों को सम्मान देने की पहल ने भी प्रशासन की मानवीय संवेदनाओं को मजबूत किया है।
पर्यटन के क्षेत्र में चम्पावत लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं की संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। एडवेंचर टूरिज्म, होमस्टे और शारदा नदी क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार हुए हैं। जिम कॉर्बेट ट्रेल जैसे प्रयासों ने भी पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया है।
शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं की सफलता ने जिले को नई पहचान दिलाई है। स्वास्थ्य सेवाओं में भी लगातार सुधार हुआ है और अधिकांश उपचार अब जिले में ही उपलब्ध होने लगे हैं। कृषि, डेयरी और उद्यान के क्षेत्र में लाल चावल, मोटे अनाज, अदरक, हल्दी, आलू बीज, फल उत्पादन तथा कीवी जैसी फसलों ने किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाई है।
सोलर ऊर्जा, डिजिटल गवर्नेंस, रिवर्स माइग्रेशन और स्वरोजगार योजनाओं ने भी जिले की विकास यात्रा को नई गति दी है। दिल्ली सहित महानगरों से लौटकर कई लोग अब अपने गांवों में आधुनिक खेती और उद्यम के जरिए नई मिसाल पेश कर रहे हैं।
हालांकि जिले के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। मानसून के दौरान टनकपुर–चम्पावत राष्ट्रीय राजमार्ग, चम्पावत–लोहाघाट मार्ग, लोहाघाट–पंचेश्वर मार्ग, देवीधुरा–बाराकोट क्षेत्र की कई संपर्क सड़कें भूस्खलन से प्रभावित होती हैं। वहीं बाराकोट, पाटी, लोहाघाट और चम्पावत ब्लॉक के कई ऊपरी ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान पेयजल संकट बना रहता है। इसके अलावा लोहाघाट, बाराकोट, पाटी, पूर्णागिरि और वन क्षेत्रों से लगे गांवों में गुलदार, भालू, जंगली सूअर और बंदरों के आतंक से ग्रामीण और किसान लंबे समय से जूझ रहे हैं। इन चुनौतियों के बीच भी प्रशासन राहत, बचाव और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
आज चम्पावत केवल मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि विकास, सुशासन और जनविश्वास की नई पहचान बनकर उभर रहा है।
बॉक्स
भाग्यशाली हैं चम्पावत और मुख्यमंत्री, जिन्हें मिला मनीष कुमार जैसा डीएम।
चम्पावत। जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली ने चम्पावत में प्रशासन की अलग पहचान बनाई है। किसान परिवार से आने वाले मनीष कुमार अपनी सादगी, त्वरित निर्णय क्षमता और जनसरोकारों के लिए जाने जाते हैं। आम जनता की शिकायतों का तत्काल समाधान, फील्ड में लगातार मौजूदगी, आपदा के समय स्वयं मोर्चा संभालना और कर्मचारियों से लेकर आम नागरिक तक के साथ मानवीय व्यवहार उनकी पहचान बन चुका है। यही कारण है कि चम्पावत में जिला प्रशासन आज केवल सरकारी व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का पर्याय बनता जा रहा है।


